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Bill Calculator & Tariff Rates 📅 February 14, 2026

Commercial Unit Rates 2026: Why Shop Electricity Bills are Double?

Commercial Unit Rates 2026: दुकान का बिजली बिल घर से दोगुना क्यों आता है? (Full Guide)
Commercial vs Domestic Electricity Unit Rates India 2026 Shop Bill

Commercial Unit Rates 2026: दुकान का बिजली बिल घर से दोगुना क्यों आता है? (Full Guide)

क्या आप भी अपनी छोटी सी दुकान, क्लीनिक या शोरूम का भारी-भरकम बिजली बिल (Electricity Bill) देखकर हैरान हैं? अक्सर दुकानदार शिकायत करते हैं कि "भाई साहब, घर में 2 AC दिन-रात चलते हैं तब भी बिल 4,000 आता है, लेकिन दुकान पर सिर्फ 4 पंखे और लाइटें हैं, फिर भी स्मार्ट मीटर (Smart Meter) लगने के बाद बिल 8,000 पार कर गया!"

भारत में, खासकर उत्तर प्रदेश (UPPCL) में, बिजली विभाग घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों (Shops/Offices) के लिए बिल्कुल अलग-अलग नियम रखता है। 2026 के नए टैरिफ नियमों के अनुसार, कमर्शियल और डोमेस्टिक बिल के बीच का अंतर अब और भी ज्यादा गहरा हो गया है।

आपकी पसंदीदा वेबसाइट `bijlibabu.in` के इस डीप-एनालिसिस में, हम समझेंगे कि वह कौन से 'हिडन चार्जेज' (Hidden Charges) और फिक्स्ड डिमांड रेट्स हैं जो दुकान के बिल को रॉकेट बना देते हैं, और 2026 में 1 यूनिट कमर्शियल बिजली की असली कीमत कितनी बैठती है।

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1. डोमेस्टिक vs कमर्शियल: LMV-1 और LMV-2 में असली अंतर

बिजली विभाग उपभोक्ताओं को अलग-अलग 'कैटेगरी' (Tariff Schedule) में बाँटता है। आपके बिजली बिल के ऊपर आपकी कैटेगरी साफ शब्दों में लिखी होती है:

  • LMV-1 (Residential / घरेलू): यह कनेक्शन आम घरों के लिए है। सरकार घरों की बिजली को 'बुनियादी ज़रूरत' (Basic Necessity) मानती है। इसलिए, सरकार यहाँ 'क्रॉस-सब्सिडी' (Cross-subsidy) देकर यूनिट के रेट को सस्ता रखती है।
  • LMV-2 (Non-Domestic/Commercial / व्यावसायिक): यह कनेक्शन दुकानों, शोरूम, रेस्टोरेंट, प्राइवेट ऑफिस और अस्पतालों के लिए है। सरकार इसे 'मुनाफा कमाने वाला स्थान' (Profit-making zone) मानती है। सरकार का तर्क है कि चूंकि आप बिजली का उपयोग पैसा कमाने के लिए कर रहे हैं, इसलिए आपको बिजली की पूरी (बिना सब्सिडी वाली) कीमत चुकानी होगी।

2. फिक्स्ड चार्ज का खेल: शटर उठाते ही ₹1,500 का बिल!

यही वह जगह है जहाँ दुकानदार सबसे ज्यादा मात खाते हैं और बिल अचानक डबल हो जाता है। घर के बिल में फिक्स्ड डिमांड चार्ज (Fixed Charge) बहुत मामूली होता है (UP में लगभग ₹110 प्रति kW)।

Commercial Reality (व्यावसायिक कड़वा सच):
दुकान या ऑफिस (LMV-2) के लिए फिक्स्ड चार्ज ₹330 से ₹450 प्रति kW (किलोवाट) तक होता है।

मान लीजिए आपकी दुकान का स्वीकृत लोड 4kW है:
👉 घर (LMV-1) में फिक्स्ड चार्ज: 4 kW × ₹110 = ₹ 440
👉 दुकान (LMV-2) में फिक्स्ड चार्ज: 4 kW × ₹330 = ₹ 1,320

यानी अगर आप पूरा महीना दुकान बंद भी रखें और एक भी यूनिट बिजली न जलाएं, तो भी ₹1,320 का फिक्स्ड बिल आपको हर हाल में भरना ही पड़ेगा।
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3. ताज़ा दरें 2026: प्रति यूनिट रेट कार्ड का सीधा मुक़ाबला

आइए उत्तर प्रदेश (UPPCL) के 2026 के शहरी (Urban) रेट्स का एक तुलनात्मक चार्ट (Comparison Chart) देखते हैं कि हर यूनिट पर आपकी जेब कितनी ढीली होती है:

यूनिट खपत (Slab)घर का रेट (LMV-1)दुकान का रेट (LMV-2)
0 - 150 Units₹ 5.50 प्रति यूनिट₹ 8.50 प्रति यूनिट
151 - 300 Units₹ 6.00 प्रति यूनिट₹ 9.20 प्रति यूनिट
301+ Units₹ 7.00 प्रति यूनिट₹ 10.00+ प्रति यूनिट

(नोट: यह सिर्फ बेस रेट है। इसमें इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी और सरचार्ज जुड़कर एक कमर्शियल यूनिट का असली खर्च ₹11 से ₹12 तक पहुँच जाता है।)

4. टैक्स और ड्यूटी: दुकानदारों से ज्यादा वसूली क्यों होती है?

एक और 'हिडन चार्ज' जो दुकान के बिल को बढ़ाता है, वह है Electricity Duty (विद्युत कर)

आम घरों के लिए विद्युत कर (Duty) आमतौर पर 5% होता है, लेकिन कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए राज्य सरकारें इसे 7.5% से लेकर 15% तक वसूलती हैं। सरकार का सीधा सा नियम है—जो व्यापार कर रहा है, उसे राज्य के विकास में टैक्स के रूप में ज्यादा योगदान देना चाहिए। अगर दुकान में 1.5 टन का AC चलता है (जो महीने की 300 यूनिट्स खाता है), तो टैक्स और महंगे रेट के कारण वही AC घर के मुकाबले दुकान में ₹1,500 अतिरिक्त खर्च करवाता है।

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5. दुकान का बिल 30% तक कम करने के 3 प्रैक्टिकल तरीके

आप सरकार के नियम तो नहीं बदल सकते, लेकिन स्मार्ट तरीके अपनाकर अपना बिल ज़रूर घटा सकते हैं:

  1. लोड मैनेजमेंट (Check Sanctioned Load): अपने बिल पर देखें कि आपका 'मंजूर लोड' (Sanctioned Load) कितना है। अगर आपकी दुकान का स्वीकृत लोड 6kW है, लेकिन आपकी खपत सिर्फ 2kW की है, तो आप हर महीने बिना वजह ₹1,300 एक्स्ट्रा फिक्स्ड चार्ज भर रहे हैं। इसे ऑनलाइन जाकर तुरंत कम (Load Reduction) करवाएं।
  2. LED और इन्वर्टर AC अनिवार्य करें: पुरानी हैलोजन लाइट्स और नॉन-इन्वर्टर AC को बाहर निकालें। कमर्शियल रेट पर 1 नॉन-इन्वर्टर AC आपको साल भर में इतना बिल दे देगा जितने में एक नया इन्वर्टर AC आ जाता है।
  3. सोलर पैनल (Solar for Shops): चूंकि दुकानें दिन में (धूप के समय) खुलती हैं, इसलिए दुकानदारों के लिए On-Grid Solar System सबसे शानदार निवेश है। दिन की पूरी बिजली सोलर से आएगी, कोई बैटरी नहीं खरीदनी पड़ेगी, और ₹10 यूनिट वाली बिजली बिल्कुल फ्री हो जाएगी।

6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या मैं अपनी दुकान में घर वाला (LMV-1) मीटर लगवा सकता हूँ?
बिल्कुल नहीं! कानूनी तौर पर यह 'दुरुपयोग' (Misuse of Tariff) की श्रेणी में आता है। विजिलेंस (Vigilance) की चेकिंग होने पर बिजली विभाग आप पर भारी जुर्माना (Penalty) लगा सकता है और बिजली चोरी (Section 135/126) का केस भी दर्ज कर सकता है।

Q2. मेरी दुकान में स्मार्ट मीटर (Smart Meter) लगने के बाद बिल अचानक ज्यादा क्यों आ रहा है?
पुराने एनालॉग मीटर खराब पावर फैक्टर (PF) और छोटी-मोटी 'लीकेज' को नहीं पढ़ पाते थे। 2026 के नए स्मार्ट मीटर kVAh (kilo-Volt-Ampere-Hour) पर बिलिंग करते हैं। अगर दुकान की वायरिंग में कोई लीकेज है या पावर फैक्टर खराब है, तो स्मार्ट मीटर उसे भी बिल में जोड़ देता है।

Q3. कमर्शियल बिल में 'Minimum Charge' क्या होता है?
कई राज्यों में नियम है कि अगर आप LMV-2 कनेक्शन लेते हैं, तो भले ही आप शटर न उठाएं, आपको हर महीने एक 'न्यूनतम राशि' (Minimum Guarantee Charge) भरनी ही होगी ताकि ग्रिड का मेंटेनेंस चलता रहे।

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