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Consumer Grievance & Complaint 📅 February 13, 2026

Consumer Forum Electricity Case 2026: e-Daakhil & Legal Notice Guide

Consumer Forum Electricity Case: बिजली विभाग के खिलाफ कोर्ट में केस कैसे करें? (2026 Legal Guide)
Consumer Court Electricity Department Legal Action Guide

Consumer Forum Electricity Case: बिजली विभाग के खिलाफ कोर्ट में केस कैसे करें? (2026 Legal Guide)

क्या बिजली विभाग ने आपको गलत बिल भेजकर परेशान कर दिया है? या फिर नया कनेक्शन देने के नाम पर अधिकारी महीनों से आपको दफ्तर के चक्कर कटवा रहे हैं? भारत में बिजली उपभोक्ताओं का शोषण एक आम बात है। कई बार SDO (Sub-Divisional Officer) या लाइनमैन आपकी शिकायत को कचरे के डिब्बे में डाल देते हैं।

लेकिन Consumer Protection Act, 2019 और Electricity Act, 2003 के तहत आपको यह अधिकार है कि आप सीधे 'कंज्यूमर फोरम' (Consumer Court) में बिजली विभाग के खिलाफ केस दर्ज कर सकते हैं। 2026 में 'e-Daakhil' (ई-दाखिल) पोर्टल आ जाने के बाद, अब आपको कोर्ट के धक्के खाने या महंगे वकील को फीस देने की भी ज़रूरत नहीं है।

इस मेगा लीगल गाइड में, हम आपको बताएंगे कि बिजली विभाग को "लीगल नोटिस" कैसे भेजें, कितना मुआवजा (Compensation) मांगें, और घर बैठे अपने मोबाइल से कंज्यूमर कोर्ट में मुकदमा कैसे दर्ज करें।

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1. किन मामलों में आप कोर्ट जा सकते हैं? (Valid Grounds for Lawsuit)

आप हर छोटी बात के लिए कोर्ट नहीं जा सकते। कोर्ट इसे "Deficiency in Service" (सेवा में कमी) मानता है। आप निम्नलिखित मामलों में केस कर सकते हैं:

  • गलत और मनमाना बिल (Wrong Billing): आपके मीटर में रीडिंग कम है, लेकिन बिल लाखों का भेज दिया गया हो और विभाग उसे ठीक न कर रहा हो।
  • नया कनेक्शन न देना: पैसे जमा करने के हफ्तों बाद भी मीटर न लगाया गया हो।
  • बिना नोटिस बिजली काटना: बिना कोई पूर्व सूचना (Notice) दिए आपका कनेक्शन काट दिया गया हो (यह Electricity Act की धारा 56 का सीधा उल्लंघन है)।
  • उपकरणों का जलना: हाई वोल्टेज (Voltage Fluctuation) के कारण आपके घर का टीवी या फ्रिज जल गया हो। इसके लिए विभाग जिम्मेदार है।
  • ट्रांसफॉर्मर न बदलना: गाँव या मोहल्ले का ट्रांसफार्मर कई दिनों से खराब हो और शिकायत के बाद भी न बदला गया हो।

2. कोर्ट जाने से पहले का स्टेप: CGRF (Consumer Grievance Redressal Forum)

कंज्यूमर कोर्ट जाने से पहले, कानून यह कहता है कि आपको बिजली विभाग के "आंतरिक न्यायालय" (Internal Court) में अपनी बात रखनी चाहिए।

हर बिजली वितरण कंपनी (जैसे UPPCL, TATA Power, SBPDCL) का अपना एक CGRF होता है।

  1. सबसे पहले CGRF में एक सादे कागज़ पर शिकायत दें।
  2. CGRF के पास फैसला सुनाने के लिए 45 दिन का समय होता है।
  3. अगर आप उनके फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप 'Electricity Ombudsman' (विद्युत लोकपाल) के पास जा सकते हैं।
  4. अगर वहाँ भी न्याय न मिले, तब Consumer Forum (उपभोक्ता न्यायालय) का दरवाज़ा खटखटाना सबसे सही रहता है।
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कोर्ट में केस फाइल करने से 30 दिन पहले बिजली विभाग को एक 'लीगल नोटिस' (Legal Notice) भेजना अनिवार्य होता है। आप इसे किसी वकील (Advocate) से भिजवा सकते हैं, या खुद रजिस्टर्ड पोस्ट (Registered Speed Post) से भेज सकते हैं।

(नोट: इस नोटिस की एक कॉपी और डाक की रसीद अपने पास सुरक्षित रखें। कोर्ट में इसकी बहुत ज़रूरत पड़ेगी।)

4. ई-दाखिल: घर बैठे ऑनलाइन केस कैसे करें? (e-Daakhil Portal)

2026 में आपको कोर्ट के धक्के खाने की ज़रूरत नहीं है। भारत सरकार ने edaakhil.nic.in पोर्टल लॉन्च किया है।

  1. रजिस्ट्रेशन: e-Daakhil वेबसाइट पर जाएं और अपना अकाउंट बनाएं।
  2. Draft Complaint: 'File a New Case' पर क्लिक करें। विपक्षी पार्टी (Opposite Party) में बिजली विभाग का नाम (उदा: MD, UPPCL) डालें।
  3. दस्तावेज़ अपलोड करें: अपना गलत बिल, आपकी शिकायत की कॉपियां, और 'लीगल नोटिस' की कॉपी PDF फॉर्मेट में अपलोड करें।
  4. फीस भरें: ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से कोर्ट फीस जमा करें।
  5. सुनवाई: कई मामलों में अब वीडियो कांफ्रेंसिंग (Video Conferencing) के जरिए भी सुनवाई हो जाती है।
प्रो टिप: कंज्यूमर कोर्ट में केस खुद लड़ने के लिए वकील की कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है (No Lawyer Required)। आप अपनी बात खुद जज (President of the Forum) के सामने रख सकते हैं।

5. कोर्ट की फीस और वकील का खर्च (Cost Analysis)

लोगों को लगता है कि कोर्ट केस में लाखों रुपये लगते हैं, लेकिन 'उपभोक्ता न्यायालय' गरीबों के लिए बनाया गया है।

दावे की राशि (Claim Amount)कोर्ट की फीस (Court Fee in 2026)
₹5 लाख तक (Up to 5 Lakhs)शून्य (Zero / Free)
₹5 लाख से ₹10 लाख तक₹200
₹10 लाख से ₹20 लाख तक₹400

वकील का खर्च (Advocate Fees): अगर आप खुद केस लड़ते हैं तो 0 रुपये। अगर आप किसी वकील को हायर करते हैं, तो वे नोटिस भेजने और केस ड्राफ्ट करने का ₹5,000 से ₹15,000 तक चार्ज कर सकते हैं। (यह पैसा आप कोर्ट से बिजली विभाग से वसूल सकते हैं)।

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6. आप कितना 'मुआवजा' (Compensation) मांग सकते हैं?

कंज्यूमर कोर्ट न केवल आपका बिल ठीक करवाता है, बल्कि आपको मानसिक प्रताड़ना के लिए पैसे भी दिलवाता है। आप अपनी 'Prayer' (प्रार्थना) में यह मांग सकते हैं:

  • बिल संशोधन: गलत बिल को रद्द किया जाए।
  • मानसिक उत्पीड़न (Mental Agony): विभाग के चक्कर काटने और मानसिक तनाव के लिए ₹20,000 से ₹50,000 तक का मुआवजा।
  • मुकदमे का खर्च (Litigation Cost): वकील की फीस, फोटोकॉपी और आने-जाने का खर्च (लगभग ₹10,000)।
  • आर्थिक नुकसान: अगर हाई वोल्टेज से आपका 50,000 का टीवी जला है, तो बिल के साथ कोर्ट में उसका भी पूरा पैसा मांगा जा सकता है।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या मैं 10 साल पुराने गलत बिल पर केस कर सकता हूँ?
नहीं। Consumer Protection Act के तहत, "Cause of Action" (विवाद उत्पन्न होने) के 2 साल के भीतर ही केस फाइल करना अनिवार्य है। 2 साल के बाद कोर्ट केस खारिज कर सकता है (Limitation Period)।

Q2. क्या केस चलने के दौरान बिजली विभाग मेरा कनेक्शन काट सकता है?
अगर आप कोर्ट से 'Stay Order' (स्थगन आदेश) ले लेते हैं, तो जब तक केस का फैसला नहीं आ जाता, बिजली विभाग आपका कनेक्शन नहीं काट सकता।

Q3. लोक अदालत (Lok Adalat) और कंज्यूमर फोरम में क्या अंतर है?
लोक अदालत में दोनों पक्ष (आप और विभाग) आपसी समझौते (Settlement) से मामला सुलझाते हैं। जबकि कंज्यूमर फोरम में जज सबूतों के आधार पर कड़ा आदेश (Order) और पेनल्टी लगाता है।

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