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Consumer Grievance & Complaint 📅 February 13, 2026

Electricity Theft Reporting India 2026: Get 10% Reward Anonymously

Electricity Theft Reporting: बिजली चोरी की गुप्त सूचना देकर ईनाम कैसे पाएं? (2026 Guide)
Report Electricity Theft Anonymously and Get Reward India

Electricity Theft Reporting: बिजली चोरी की गुप्त सूचना देकर ईनाम कैसे पाएं? (2026 Guide)

क्या आपके पड़ोस में कोई कटिया (Direct Hooking) डालकर AC चला रहा है और उसका बोझ आप ईमानदारी से बिल भरकर उठा रहे हैं? भारत में हर साल हज़ारों करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो जाती है। जब लाइन लॉस (Line Loss) बढ़ता है, तो बिजली विभाग ईमानदार उपभोक्ताओं का ही टैरिफ रेट (बिजली का दाम) बढ़ा देता है।

लेकिन अब आप इस चोरी को रोक भी सकते हैं और लाखों रुपये का ईनाम (Reward) भी कमा सकते हैं। उत्तर प्रदेश (UPPCL) सहित भारत के कई राज्यों ने 2026 में 'मुखबिर योजना' (Informer Scheme) को पूरी तरह से डिजिटल और गुप्त बना दिया है। सबसे अच्छी बात यह है कि सूचना देने वाले का नाम 100% गुप्त (Anonymous) रखा जाता है, यहाँ तक कि बिजली विभाग के कर्मचारियों को भी आपका नाम नहीं पता चलता।

इस मेगा गाइड में हम आपको बताएंगे कि चोरी की शिकायत करने का सही तरीका क्या है, आपको कितना ईनाम मिलेगा, और पैसे सीधे आपके बैंक खाते में कैसे आएंगे।

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1. ईनाम की योजना क्या है? (The 10% Reward Rule)

विभिन्न राज्यों की पावर कॉर्पोरेशन (जैसे UPPCL) ने चोरी पकड़ने के लिए एक आकर्षक प्रोत्साहन (Incentive) योजना लागू की है।

ईनाम का गणित: सूचना देने वाले (Informer) को उस जुर्माने (Penalty/Assessment Amount) का 10% हिस्सा ईनाम के रूप में दिया जाता है, जो चोर से वसूला जाता है।

चोरी का प्रकारजुर्माना (Penalty)आपको मिलने वाला ईनाम (10%)
एक साधारण घर (AC/Heater की चोरी)₹1,00,000₹10,000
कमर्शियल दुकान / मॉल₹5,00,000₹50,000
बड़ी फैक्ट्री / कारखाना₹20,00,000₹2,00,000

यानी, अगर आप किसी फैक्ट्री में हो रही बड़ी चोरी पकड़वाते हैं, तो आप घर बैठे लाखों रुपये कमा सकते हैं।

2. गुप्त शिकायत कैसे करें? (UP Bijli Mitra & Portals)

लोग शिकायत करने से डरते हैं कि कहीं चोर को उनका नाम न पता चल जाए। इसलिए विभाग ने सिस्टम को 'Anonymous' (गुमनाम) कर दिया है।

A. UPPCL का 'बिजली मित्र' (Bijli Mitra) पोर्टल

उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए UPPCL ने bijlimitra.uppcl.org नाम का एक विशेष पोर्टल बनाया है।

  • आप वेबसाइट पर जाकर बिना अपना नाम, मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी दिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • अगर आप ईनाम चाहते हैं, तभी आपको अपनी बैंक डिटेल्स (और एक सीक्रेट कोड) देना होता है, जिसे 'एन्क्रिप्ट' (Encrypt) कर दिया जाता है।

B. टोल-फ्री नंबर और विजिलेंस

आप किसी भी राज्य से 1912 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल उठाते ही ऑपरेटर से कहें कि "मुझे विजिलेंस (Vigilance) विभाग में बिजली चोरी की गुप्त सूचना देनी है।" वे आपको एंटी-पावर थेफ़्ट स्क्वाड (Anti-Power Theft Squad) से जोड़ देंगे।

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3. शिकायत में कौन से सबूत (Evidence) ज़रूरी हैं?

अगर आप बिना किसी सबूत के कहेंगे कि "पड़ोसी चोरी कर रहा है", तो विजिलेंस टीम शायद ध्यान न दे। एक पक्की शिकायत के लिए ये चीज़ें अपलोड करें या बताएं:

  1. फोटो या वीडियो: अगर कटिया (Direct Hooking) डली है या मीटर बायपास है, तो दूर से उसकी स्पष्ट फोटो खींच लें।
  2. लोकेशन (Address): मकान नंबर, गली का नाम और सबसे ज़रूरी—नजदीकी खंभे का नंबर (Pole Number) या ट्रांसफॉर्मर का नाम ज़रूर बताएं।
  3. चोरी का समय: कई लोग रात में 11 बजे कटिया डालते हैं और सुबह 5 बजे निकाल लेते हैं। टीम को बताएं कि रेड (Raid) किस समय करनी है।

4. ईनाम का पैसा आपके बैंक में कैसे आता है? (The Payout Process)

ईनाम का पैसा रेड (छापेमारी) के तुरंत बाद नहीं मिलता। इसकी एक कानूनी प्रक्रिया होती है:

  1. छापेमारी (The Raid): आपकी सूचना पर विजिलेंस टीम (पुलिस के साथ) छापा मारती है।
  2. असेसमेंट (Assessment): टीम देखती है कि चोर कितने किलोवाट (kW) की चोरी कर रहा था और उसके आधार पर 'राजस्व निर्धारण' (जुर्माना) तय करती है।
  3. FIR दर्ज होना: एंटी-पावर थेफ़्ट थाने में बिजली अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत FIR होती है।
  4. जुर्माना वसूली (Recovery): जब चोर वह पूरा जुर्माना (Compounding Fee) बिजली विभाग में जमा कर देता है, उसके बाद ही फाइल क्लियर होती है।
  5. ईनाम का भुगतान: जुर्माना जमा होने के लगभग 30-60 दिनों के भीतर आपके द्वारा दिए गए बैंक खाते में 10% राशि (NEFT/RTGS) ट्रांसफर कर दी जाती है।
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अगर कोई सोचता है कि वह चोरी करेगा और थोड़ी सी 'सेटिंग' करके बच जाएगा, तो 2026 में यह नामुमकिन है।

Electricity Act 2003 की धारा 135:
इसके तहत बिजली चोरी एक 'गैर-जमानती अपराध' (Non-Bailable Offence) है।
👉 अगर लोड 10 kW से कम है: तो चोरी की गई बिजली के बिल का 3 गुना जुर्माना और जेल।
👉 अगर लोड 10 kW से ज्यादा है: तो जुर्माने के साथ-साथ 6 महीने से लेकर 5 साल तक की सख्त कैद (जेल) का प्रावधान है।

6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या मेरे मोहल्ले के लाइनमैन को पता चल जाएगा कि शिकायत मैंने की है?
बिल्कुल नहीं। यह पोर्टल सीधे राज्य के 'Vigilance Headquarters' (जैसे लखनऊ या पटना) द्वारा कंट्रोल किया जाता है। लोकल JE या लाइनमैन को सिर्फ रेड (छापेमारी) मारने का आदेश ऊपर से मिलता है। आपका डेटा किसी को नहीं दिखता।

Q2. अगर चोर ने जुर्माना नहीं भरा तो क्या मुझे ईनाम मिलेगा?
नहीं। सरकारी नियम के अनुसार, जब तक विभाग को जुर्माने के रूप में राजस्व (Revenue) की प्राप्ति नहीं होती, तब तक ईनाम की राशि जारी नहीं की जा सकती। हालांकि, FIR होने के कारण चोर को जुर्माना भरना ही पड़ता है।

Q3. क्या मैं मीटर के साथ छेड़छाड़ (Tampering) की शिकायत भी कर सकता हूँ?
हाँ, मीटर की सील तोड़ना, रिमोट से मीटर रोकना या स्मार्ट मीटर को बायपास करना भी धारा 135 के तहत चोरी ही माना जाता है।

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