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Green Hydrogen & Future Fuels 📅 February 12, 2026

Grey vs Blue vs Green Hydrogen: What is the Difference? (2026 Guide)

Grey vs Blue vs Green Hydrogen: रंगों का क्या मतलब है और कौन सा सबसे साफ है? (Full Guide)
Difference between Green Blue and Grey Hydrogen

Grey vs Blue vs Green Hydrogen: रंगों का क्या मतलब है और कौन सा सबसे साफ है? (Full Guide)

हाइड्रोजन एक रंगहीन (Colorless) गैस है, फिर भी इसे 'हरा', 'नीला' या 'स्लेटी' क्यों कहा जाता है? दरअसल, ये रंग बताते हैं कि उस हाइड्रोजन को बनाया कैसे गया है। आज के समय में "Green Hydrogen" को भविष्य का ईंधन (Fuel of Future) माना जा रहा है।

भारत सरकार के "National Green Hydrogen Mission" के तहत 2030 तक भारत को हाइड्रोजन का हब बनाने की योजना है। अगर आप निवेश करना चाहते हैं या विज्ञान को समझना चाहते हैं, तो इन रंगों का अंतर जानना बहुत ज़रूरी है।

1. हाइड्रोजन 'कलर कोड' क्या है? (The Color Spectrum)

हाइड्रोजन ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला तत्व है, लेकिन यह धरती पर शुद्ध रूप में नहीं मिलता। यह हमेशा किसी और चीज़ (जैसे पानी H₂O या मीथेन CH₄) के साथ जुड़ा होता है।

इसे अलग करने के लिए हमें ऊर्जा (Energy) की ज़रूरत होती है। हम कौन सी ऊर्जा इस्तेमाल करते हैं और इस प्रक्रिया में कितना प्रदूषण (Carbon) निकलता है, उसी आधार पर इसे रंग दिया गया है।

2. Grey Hydrogen (ग्रे हाइड्रोजन) - सबसे सस्ता लेकिन गंदा

आज दुनिया में 95% से ज्यादा हाइड्रोजन 'Grey' है।

  • स्रोत: प्राकृतिक गैस (Natural Gas) या मीथेन।
  • प्रक्रिया: इसे 'Steam Methane Reforming' (SMR) कहते हैं। इसमें भाप और मीथेन को मिलाकर हाइड्रोजन अलग किया जाता है।
  • नुकसान: इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) निकलती है जो सीधे हवा में छोड़ दी जाती है।
  • लागत: यह सबसे सस्ता है ($1 - $1.5 प्रति किलो)।

3. Blue Hydrogen (ब्लू हाइड्रोजन) - बीच का रास्ता

यह Grey Hydrogen का ही एक सुधरा हुआ रूप है। प्रक्रिया वही है, लेकिन परिणाम अलग है।

  • प्रक्रिया: इसमें भी SMR तकनीक का उपयोग होता है।
  • अंतर: जो कार्बन (CO₂) निकलता है, उसे हवा में छोड़ने के बजाय "Carbon Capture and Storage" (CCS) तकनीक से ज़मीन के नीचे स्टोर कर दिया जाता है।
  • फायदा: यह 'Low Carbon' ईंधन है, लेकिन 'Zero Carbon' नहीं।

4. Green Hydrogen (ग्रीन हाइड्रोजन) - सबसे साफ़

यही वह ईंधन है जिसकी चर्चा पूरी दुनिया (Reliance, Adani, Tata) कर रही है।

[Image of Green Hydrogen Production Process]
  • स्रोत: पानी (H₂O) और रिन्यूएबल एनर्जी (सौर/पवन ऊर्जा)।
  • प्रक्रिया: इसे Electrolysis कहते हैं। पानी में बिजली दौड़ाकर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है।
  • प्रदूषण: शून्य! (Zero Emissions)। इसका बाय-प्रोडक्ट सिर्फ 'शुद्ध ऑक्सीजन' है।
  • लागत: अभी यह महंगा है ($4 - $6 प्रति किलो), लेकिन तकनीक बढ़ने पर सस्ता होगा।

5. तुलना चार्ट (Difference Table)

फीचरGrey HydrogenBlue HydrogenGreen Hydrogen
कच्चा मालNatural Gas (Fossil Fuel)Natural Gas + CCSWater + Renewable Energy
कार्बन उत्सर्जनबहुत ज्यादा (High)कम (Low)शून्य (Zero)
लागत (Cost)सस्तामध्यममहंगा (अभी)
भविष्यखत्म हो रहा हैट्रांजिशन फेजफ्यूचर (Future)
बोनस फैक्ट: इनके अलावा Brown Hydrogen (कोयले से बनने वाला) और Pink Hydrogen (न्यूक्लियर पावर से बनने वाला) भी होते हैं।

6. भारत का ग्रीन हाइड्रोजन प्लान (Investment Opportunity)

भारत सरकार ने ₹19,744 करोड़ के बजट के साथ "National Green Hydrogen Mission" लांच किया है। इसका लक्ष्य 2030 तक 5 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) उत्पादन का है।

निवेश के लिए प्रमुख कंपनियां:

  • Reliance Industries: गुजरात में गीगा फैक्ट्री लगा रही है।
  • Adani New Industries: दुनिया का सबसे सस्ता ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का लक्ष्य।
  • L&T, IOCL, और NTPC: ये सभी बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. ग्रीन हाइड्रोजन अभी इतना महंगा क्यों है?
इसका मुख्य कारण 'Electrolyzer' (मशीन) की उच्च लागत और रिन्यूएबल एनर्जी की उपलब्धता है।

Q2. क्या हाइड्रोजन बम और हाइड्रोजन फ्यूल एक ही है?
नहीं, बिल्कुल नहीं। हाइड्रोजन बम 'Nuclear Fusion' पर आधारित है, जबकि फ्यूल 'Chemical Reaction' है। यह पूरी तरह सुरक्षित है।

Q3. क्या मैं ग्रीन हाइड्रोजन स्टॉक्स में निवेश कर सकता हूँ?
हाँ, आप रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के शेयर खरीदकर इस क्रांति का हिस्सा बन सकते हैं।

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