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Green Hydrogen & Future Fuels 📅 February 12, 2026

National Green Hydrogen Mission 2026: SIGHT Scheme & Production Guide

Green Hydrogen Mission India: क्या पानी से बिजली और ईंधन बनेगा? (Full Guide 2026)
Green Hydrogen Mission India Explanation

Green Hydrogen Mission India: क्या पानी से बिजली और ईंधन बनेगा? (Full Guide 2026)

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी कार पानी से चल सकती है? यह विज्ञान कथा (Sci-Fi) नहीं, बल्कि भारत का भविष्य है। भारत सरकार ने National Green Hydrogen Mission के तहत पानी को ईंधन में बदलने की क्रांतिकारी शुरुआत की है।

2026 में, भारत दुनिया का "Green Hydrogen Hub" बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने इसके लिए ₹19,744 करोड़ का बजट पास किया है। इस पोस्ट में हम जानेंगे कि यह मिशन क्या है, पानी से ईंधन कैसे बनता है, और इससे आपकी जिंदगी कैसे बदलेगी।

1. राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है? (What is the Mission?)

यह भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर' बनाना है। आज हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पेट्रोल-डीजल और कोयले पर निर्भर हैं, जिससे प्रदूषण होता है और पैसा विदेश जाता है।

इस मिशन का लक्ष्य जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) को हटाकर ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करना है। इसका उपयोग कारों में, फैक्ट्रियों में और बिजली बनाने में किया जाएगा।

2. पानी से ईंधन कैसे बनता है? (The Science: Electrolysis)

यह प्रक्रिया सुनने में जादुई लगती है, लेकिन यह शुद्ध विज्ञान है। इसे Electrolysis (विद्युत अपघटन) कहते हैं।

फॉर्मूला: पानी (H₂O) + बिजली (Current) = हाइड्रोजन (H₂) + ऑक्सीजन (O₂)
  • स्टेप 1: पानी में एक मशीन (Electrolyzer) के जरिए बिजली दौड़ी जाती है।
  • स्टेप 2: यह बिजली 'रिन्यूएबल सोर्स' (जैसे सोलर या विंड एनर्जी) से आनी चाहिए।
  • स्टेप 3: पानी दो भागों में टूट जाता है - हाइड्रोजन और ऑक्सीजन।
  • स्टेप 4: हाइड्रोजन को गैस के रूप में स्टोर कर लिया जाता है, जिसे बाद में ईंधन की तरह जलाया जा सकता है।

चूंकि इसमें बिजली सौर/पवन ऊर्जा से आती है और जलने पर सिर्फ पानी निकलता है, इसलिए इसे "Green Hydrogen" कहते हैं।

3. बजट और 2030 के लक्ष्य (Mission Targets)

सरकार ने इस मिशन के लिए जो रोडमैप तैयार किया है, वह बहुत बड़ा है।

विवरणलक्ष्य (Target 2030)
कुल बजट₹19,744 करोड़
उत्पादन क्षमता5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) प्रति वर्ष
रिन्यूएबल एनर्जी125 गीगावाट (GW) नई क्षमता जुड़ेगी
निवेश (Investment)₹8 लाख करोड़ का निवेश आने की उम्मीद
रोजगार6 लाख से ज्यादा नई नौकरियां

4. SIGHT स्कीम और सब्सिडी (Incentives)

इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है SIGHT (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition) प्रोग्राम। इसके तहत सरकार दो चीजों पर पैसा दे रही है:

  1. Electrolyzer Manufacturing: मशीन बनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन (₹4,440 करोड़)।
  2. Green Hydrogen Production: हाइड्रोजन बनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन (₹13,050 करोड़)।

रिलायंस, अडानी और L&T जैसी कंपनियां इसका लाभ उठा रही हैं।

5. आम आदमी को क्या फायदा होगा? (Benefits)

शायद आप सोच रहे होंगे कि इससे मुझे क्या मिलेगा? इसके फायदे दूरगामी हैं:

  • सस्ती ऊर्जा: भविष्य में जब पेट्रोल-डीजल खत्म होने लगेगा, हाइड्रोजन एक सस्ता विकल्प बनेगा।
  • प्रदूषण मुक्ति: शहरों की हवा साफ होगी क्योंकि गाड़ियों से धुआं नहीं, पानी निकलेगा।
  • बिजली स्टोरेज: हाइड्रोजन का उपयोग एक 'बैटरी' की तरह किया जा सकता है जो एक्स्ट्रा सोलर बिजली को स्टोर करके रात में सप्लाई कर सके।

6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या मेरे घर के नल के पानी से हाइड्रोजन बन सकता है?
सैद्धांतिक रूप से हाँ, लेकिन इसके लिए 'De-mineralized' (शुद्ध) पानी की ज़रूरत होती है। साधारण पानी मशीन को खराब कर सकता है।

Q2. क्या हाइड्रोजन कारें भारत में आ गई हैं?
हाँ, टोयोटा मिराई (Toyota Mirai) और टाटा की हाइड्रोजन बसें (Tata Hydrogen Bus) पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली और लेह में चल रही हैं।

Q3. इसमें सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
सबसे बड़ी चुनौती 'लागत' (Cost) है। अभी ग्रीन हाइड्रोजन बनाना पेट्रोल से 3-4 गुना महंगा है। सरकार का लक्ष्य इसे $1 प्रति किलो तक लाना है।

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