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Industrial Power Solutions 📅 February 13, 2026

Open Access Power India 2026: Buy Cheap Electricity from IEX

Open Access Power: बड़ी कंपनियां सीधे एक्सचेंज से सस्ती बिजली कैसे खरीद सकती हैं? (2026 B2B Guide)
Open Access Power Industrial Electricity Tariff IEX India 2026

Open Access Power: बड़ी कंपनियां सीधे एक्सचेंज से सस्ती बिजली कैसे खरीद सकती हैं? (2026 B2B Guide)

क्या आप एक फैक्ट्री, मॉल, या बड़ा कमर्शियल अस्पताल चलाते हैं? अगर हाँ, तो आप जानते होंगे कि राज्य के बिजली विभाग (Discoms जैसे UPPCL, BESCOM) कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं से ₹8 से ₹10 प्रति यूनिट तक का भारी टैरिफ (Tariff) वसूलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे कारखानों से मुनाफा कमाकर किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी देते हैं। इसे "क्रॉस-सब्सिडी" कहा जाता है।

लेकिन क्या होगा अगर हम आपसे कहें कि आपको UPPCL या अपने राज्य के बिजली बोर्ड से बिजली खरीदने की कोई ज़रूरत नहीं है? क्या होगा अगर आप शेयर बाज़ार (Stock Market) की तरह सीधे किसी 'पावर एक्सचेंज' से मात्र ₹3 से ₹4 प्रति यूनिट में बिजली खरीद सकें?

इसे "Open Access Power" (ओपन एक्सेस पावर) कहते हैं। 2026 के नए ग्रीन एनर्जी नियमों के बाद, यह अब सिर्फ रिलायंस या टाटा जैसी बड़ी कंपनियों का खेल नहीं रहा; बल्कि 100 kW लोड वाली एक मीडियम साइज़ फैक्ट्री भी इसका फायदा उठा सकती है। आइए इस डीप-टेक कमर्शियल गाइड में समझते हैं कि यह कैसे काम करता है।

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1. Open Access Power क्या है? (बिचौलिए को हटाना)

सिंपल भाषा में समझें: अभी आपकी फैक्ट्री तक जो बिजली आती है, वह कोई पावर प्लांट (जैसे NTPC या Tata Power) बनाता है। वह प्लांट बिजली को UPPCL (लोकल डिस्कॉम) को बेचता है, और UPPCL अपना कमीशन और टैक्स जोड़कर वह बिजली आपको बेचता है।

Open Access (ओपन एक्सेस) आपको यह आज़ादी देता है कि आप UPPCL (बिचौलिए) को बीच से हटा दें और सीधा पावर प्लांट या पावर एक्सचेंज से बिजली खरीद लें। हालाँकि, बिजली आपकी फैक्ट्री तक उसी सरकारी तार (Transmission Line) से आएगी, जिसके लिए आपको सरकार को एक छोटा सा "टोल टैक्स" (Wheeling Charge) देना होगा।

2. IEX (इंडियन एनर्जी एक्सचेंज): बिजली का 'शेयर बाज़ार'

अगर आप स्टॉक मार्केट में रुचि रखते हैं, तो आपने IEX (Indian Energy Exchange) का शेयर ज़रूर देखा होगा। यह भारत का पहला और सबसे बड़ा पावर एक्सचेंज है।

जैसे स्टॉक मार्केट में शेयर्स खरीदे और बेचे जाते हैं, वैसे ही IEX पर बिजली (Electricity) खरीदी और बेची जाती है।

  • Sellers (बेचने वाले): Tata Power, Adani Green, JSW Energy जैसी कंपनियाँ अपनी बनाई हुई बिजली यहाँ सेल (Sell) पर लगाती हैं।
  • Buyers (खरीदने वाले): बड़ी फैक्टरियां, IT पार्क्स, और यहाँ तक कि राज्य के बिजली बोर्ड भी यहाँ से सस्ती बिजली खरीदते हैं।

इस एक्सचेंज पर बिजली का भाव डिमांड और सप्लाई के हिसाब से हर 15 मिनट में बदलता है। कई बार रात में या अच्छी हवा चलने पर (Wind Energy), बिजली का भाव यहाँ ₹2 से ₹3 प्रति यूनिट तक गिर जाता है!

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3. गेम चेंजर: Green Open Access Rules (100 kW)

पहले ओपन एक्सेस का फायदा सिर्फ वही कंपनियाँ उठा सकती थीं जिनका लोड 1 MW (1000 kW) या उससे ज्यादा था। लेकिन भारत सरकार ने Green Open Access Rules 2022/2026 लागू करके पूरी इंडस्ट्री बदल दी।

नया नियम: अब अगर आपकी फैक्ट्री का स्वीकृत लोड मात्र 100 kW (या उससे अधिक) है, तो आप ओपन एक्सेस के लिए अप्लाई कर सकते हैं। शर्त यह है कि आप जो बिजली खरीदेंगे, वह 100% रिन्यूएबल (Green Energy) होनी चाहिए, यानी सोलर या विंड पावर।

यह नियम 'Tata Power' और 'Adani Green' जैसी कंपनियों के लिए वरदान साबित हुआ है, क्योंकि अब वे डायरेक्ट हज़ारों छोटी फैक्ट्रियों के साथ PPA (Power Purchase Agreement) साइन कर पा रही हैं।

4. हिडन चार्जेज: CSS, Wheeling, और Transmission

आप सोच रहे होंगे कि अगर एक्सचेंज पर बिजली ₹3 की है, तो सभी लोग UPPCL को क्यों नहीं छोड़ देते? इसका कारण हैं सरकार द्वारा लगाए गए कुछ ओपन एक्सेस चार्जेज:

चार्ज का नामयह क्यों लगता है?अनुमानित लागत
Wheeling Charges (व्हीलिंग)बिजली आपके राज्य के डिस्कॉम के तारों और खंभों से होकर आएगी, यह उस 'तार' के इस्तेमाल का किराया है।₹0.50 - ₹1.00 / यूनिट
Cross Subsidy Surcharge (CSS)चूँकि आप डिस्कॉम से महंगी बिजली नहीं खरीद रहे, सरकार को किसानों को सब्सिडी देने में घाटा होगा। उसकी भरपाई के लिए यह सरचार्ज लगता है।₹1.00 - ₹1.80 / यूनिट
Transmission Lossतारों में जो बिजली हीट बनकर उड़ जाती है, उसका नुकसान।2% से 5%

(नोट: कई राज्यों ने Green Energy को बढ़ावा देने के लिए CSS और Wheeling Charges को 50% से 100% तक माफ़ (Waive-off) कर दिया है।)

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5. ROI कैलकुलेशन: डिस्कॉम vs ओपन एक्सेस

आइए एक असली कमर्शियल बिल का गणित (Maths) समझते हैं:

1. UPPCL / लोकल डिस्कॉम से खरीदने पर:
औद्योगिक रेट = ₹8.50/यूनिट + फिक्स्ड चार्ज + ड्यूटी = कुल ₹9.50/यूनिट

2. IEX (Open Access) से ग्रीन एनर्जी खरीदने पर:
एक्सचेंज पर बिजली का भाव = ₹3.50
व्हीलिंग और ट्रांसमिशन = ₹0.80
CSS और अन्य चार्ज = ₹1.20
कुल लैंडिंग कॉस्ट = ₹5.50/यूनिट

सीधी बचत: ₹4.00 प्रति यूनिट! अगर कोई फैक्ट्री महीने की 1 लाख यूनिट इस्तेमाल करती है, तो उसकी सीधी बचत ₹4,00,000 प्रति माह होती है।

6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या ओपन एक्सेस के लिए नया मीटर लगाना पड़ता है?
हाँ। आपको एक स्पेशल ABT (Availability Based Tariff) मीटर लगाना होता है। यह स्मार्ट मीटर हर 15 मिनट का डेटा (15-min time block) रिकॉर्ड करता है, क्योंकि एक्सचेंज पर बिजली का भाव हर 15 मिनट में बदलता है।

Q2. अगर किसी दिन IEX पर बिजली न मिले तो क्या फैक्ट्री बंद हो जाएगी?
नहीं। आपका लोकल डिस्कॉम (जैसे UPPCL) एक 'Standby Provider' की तरह काम करता है। जिस दिन आपको एक्सचेंज से सस्ती बिजली नहीं मिलती, उस दिन आप स्वचालित रूप से डिस्कॉम की ग्रिड से बिजली ले सकते हैं (जिसके लिए स्टैंडबाय चार्ज लगता है)।

Q3. मुझे ओपन एक्सेस अप्रूवल (Approval) कौन देगा?
2026 में, भारत सरकार ने एक 'Single Window Green Open Access Portal' लॉन्च कर दिया है। आपको फाइलें लेकर दफ्तरों में नहीं घूमना है, आप ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं और 15 दिनों में 'डीम्ड अप्रूवल' (Deemed Approval) मिल जाता है।

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