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Industrial Power Solutions 📅 February 14, 2026

Open Access Power India 2026: IEX & Group Captive PPA Guide

Open Access Power: बड़ी कंपनियां सीधे एक्सचेंज से सस्ती बिजली कैसे खरीद सकती हैं? (2026 B2B Mega Guide)
Open Access Power Industrial Electricity Tariff IEX India 2026

Open Access Power: बड़ी कंपनियां सीधे एक्सचेंज से सस्ती बिजली कैसे खरीद सकती हैं? (2026 B2B Guide)

क्या आप एक फैक्ट्री, मॉल, IT पार्क या बड़ा कमर्शियल अस्पताल चलाते हैं? अगर हाँ, तो आपको यह अच्छी तरह पता होगा कि राज्य के बिजली विभाग (Discoms जैसे UPPCL, BESCOM, MSEDCL) कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं से ₹8 से ₹10 प्रति यूनिट तक का भारी टैरिफ (Tariff) वसूलते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि उद्योगों से मुनाफा कमाकर किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती या मुफ्त बिजली दी जा सके। इसे "क्रॉस-सब्सिडी" (Cross-Subsidy) कहा जाता है।

लेकिन क्या होगा अगर हम आपसे कहें कि आपको UPPCL या अपने राज्य के बिजली बोर्ड से इतनी महंगी बिजली खरीदने की कोई मजबूरी नहीं है? क्या होगा अगर आप शेयर बाज़ार (Stock Market) की तरह सीधे किसी 'पावर एक्सचेंज' से मात्र ₹3 से ₹4 प्रति यूनिट में बिजली खरीद सकें?

इस पूरी प्रक्रिया को "Open Access Power" (ओपन एक्सेस पावर) कहा जाता है। 2026 में लागू हुए नए ग्रीन एनर्जी नियमों के बाद, यह सुविधा अब सिर्फ रिलायंस (Reliance) या टाटा (Tata) जैसी बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है; बल्कि 100 kW लोड वाली एक मीडियम साइज़ फैक्ट्री (MSME) भी इसका फायदा उठाकर हर महीने लाखों रुपये बचा सकती है। आइए इस डीप-टेक कमर्शियल गाइड में समझते हैं कि यह कैसे काम करता है।

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1. Open Access Power क्या है? (बिचौलिए को हटाना)

इसे एक बहुत ही आसान उदाहरण से समझते हैं: अभी आपकी फैक्ट्री तक जो बिजली आती है, वह कोई पावर प्लांट (जैसे NTPC या Tata Power) बनाता है। वह प्लांट उस बिजली को UPPCL (लोकल डिस्कॉम) को थोक भाव में बेचता है, और UPPCL अपना भारी कमीशन, लाइन लॉस और टैक्स जोड़कर वह बिजली आपको बेचता है।

Open Access (ओपन एक्सेस) एक ऐसा कानूनी अधिकार (Legal Right) है जो आपको यह आज़ादी देता है कि आप UPPCL (बिचौलिए) को बीच से हटा दें। आप सीधा पावर प्लांट या पावर एक्सचेंज से थोक भाव में बिजली खरीद सकते हैं। हालाँकि, बिजली आपकी फैक्ट्री तक उसी सरकारी तार (Transmission Line) से आएगी, जिसके लिए आपको सरकार को एक छोटा सा "टोल टैक्स" (Wheeling Charge) देना होगा।

2. IEX (इंडियन एनर्जी एक्सचेंज): बिजली का 'शेयर बाज़ार'

अगर आप स्टॉक मार्केट में रुचि रखते हैं, तो आपने IEX (Indian Energy Exchange) का शेयर ज़रूर देखा होगा। यह भारत का पहला और सबसे बड़ा पावर ट्रेडिंग एक्सचेंज है।

जैसे स्टॉक मार्केट (NSE/BSE) में शेयर्स खरीदे और बेचे जाते हैं, बिल्कुल वैसे ही IEX पर बिजली (Electricity) के ब्लॉक्स खरीदे और बेचे जाते हैं।

  • Sellers (बेचने वाले): Tata Power, Adani Green, JSW Energy जैसी बड़ी जनरेशन कंपनियाँ अपनी बनाई हुई बिजली यहाँ सेल (Sell) पर लगाती हैं।
  • Buyers (खरीदने वाले): बड़ी फैक्टरियां, IT पार्क्स, रेलवे, और यहाँ तक कि राज्य के बिजली बोर्ड भी यहाँ से सस्ती बिजली खरीदते हैं।

इस एक्सचेंज पर बिजली का भाव डिमांड और सप्लाई के हिसाब से हर 15 मिनट (15-Minute Time Block) में बदलता है। कई बार रात के समय या जब बहुत अच्छी हवा चलती है (Wind Energy), तो बिजली का भाव यहाँ ₹2 से ₹3 प्रति यूनिट तक गिर जाता है!

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3. गेम चेंजर: Green Open Access Rules 2026 (100 kW)

कुछ साल पहले तक ओपन एक्सेस का फायदा सिर्फ वही विशाल कंपनियाँ उठा सकती थीं जिनका सैंक्शन लोड (Sanctioned Load) 1 MW (1000 kW) या उससे ज्यादा था। लेकिन भारत सरकार ने Green Open Access Rules लागू करके पूरी इंडस्ट्री का नज़रिया बदल दिया।

2026 का नया नियम: अब अगर आपकी फैक्ट्री का स्वीकृत लोड मात्र 100 kW (या उससे अधिक) है, तो भी आप ओपन एक्सेस के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसकी एकमात्र शर्त यह है कि आप जो बिजली खरीदेंगे, वह 100% रिन्यूएबल (Green Energy) होनी चाहिए, यानी सोलर (Solar), विंड (Wind) या हाइड्रो पावर।

यह नियम 'Tata Power Renewables' और 'Adani Green' जैसी कंपनियों के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित हुआ है। अब ये कंपनियाँ डायरेक्ट हज़ारों छोटी और मध्यम (MSME) फैक्ट्रियों के साथ PPA (Power Purchase Agreement) साइन कर भारी मुनाफा कमा रही हैं।

4. Captive, Group Captive और Third Party PPA क्या हैं?

ओपन एक्सेस के ज़रिए बिजली खरीदने के मुख्य 3 तरीके होते हैं:

मॉडल (Model)यह कैसे काम करता है?सबसे बड़ा फायदा
Captive (कैप्टिव)फैक्ट्री मालिक खुद का सोलर या विंड प्लांट (कहीं और) लगाता है और उसकी 100% बिजली खुद इस्तेमाल करता है।Cross Subsidy Surcharge (CSS) पूरी तरह माफ़ होता है।
Group Captive (ग्रुप कैप्टिव)कई कंपनियाँ मिलकर एक सोलर प्लांट में 26% की इक्विटी (शेयर) खरीदती हैं और 51% बिजली इस्तेमाल करती हैं।कम निवेश में CSS माफ़ हो जाता है (सबसे लोकप्रिय मॉडल)।
Third Party (थर्ड पार्टी)आप सीधा Adani या Tata Power से एक रेट (जैसे ₹4/यूनिट) पर 10-15 साल का अग्रीमेंट (PPA) कर लेते हैं।आपको कोई कैपिटल (पैसा) निवेश नहीं करना पड़ता।
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5. हिडन चार्जेज: CSS, Wheeling, और Transmission

आप सोच रहे होंगे कि अगर एक्सचेंज पर बिजली ₹3 की है, तो सभी लोग UPPCL को क्यों नहीं छोड़ देते? इसका कारण हैं राज्य सरकारों (SERCs) द्वारा लगाए गए कुछ ओपन एक्सेस चार्जेज (Open Access Charges):

  • Wheeling Charges (व्हीलिंग चार्ज): चूंकि बिजली आपके राज्य के डिस्कॉम के तारों और खंभों से होकर आएगी, यह उस 'तार' के इस्तेमाल का किराया (Rent) है। (लगभग ₹0.50 - ₹1.00 / यूनिट)।
  • Cross Subsidy Surcharge (CSS): चूँकि आप डिस्कॉम से महंगी बिजली नहीं खरीद रहे, सरकार को किसानों को सब्सिडी देने में घाटा होगा। उसकी भरपाई के लिए यह सरचार्ज लगता है। (लगभग ₹1.00 - ₹1.80 / यूनिट)। नोट: कैप्टिव और ग्रुप कैप्टिव मॉडल में यह माफ़ होता है।
  • Transmission Loss: तारों में जो बिजली हीट (Heat) बनकर उड़ जाती है, उसका नुकसान। (2% से 5%)।

6. ROI कैलकुलेशन: डिस्कॉम vs ओपन एक्सेस की लैंडिंग कॉस्ट

आइए एक असली कमर्शियल बिल का गणित (Maths) समझते हैं:

1. UPPCL / लोकल डिस्कॉम से खरीदने पर:
औद्योगिक रेट = ₹8.50/यूनिट + फिक्स्ड चार्ज + ड्यूटी = कुल ₹9.50/यूनिट

2. IEX या PPA (Open Access) से ग्रीन एनर्जी खरीदने पर:
पावर प्लांट/एक्सचेंज पर बिजली का भाव = ₹3.50
व्हीलिंग और ट्रांसमिशन = ₹0.80
CSS और अन्य चार्ज = ₹1.20
कुल लैंडिंग कॉस्ट (Landing Cost) = ₹5.50/यूनिट

सीधी बचत: ₹4.00 प्रति यूनिट!
अगर कोई फैक्ट्री महीने की 1 लाख यूनिट इस्तेमाल करती है, तो उसकी सीधी बचत ₹4,00,000 प्रति माह होती है। यह सीधे आपके मुनाफे (Bottom-line Profit) में जुड़ता है।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या ओपन एक्सेस के लिए फैक्ट्री में नया मीटर लगाना पड़ता है?
हाँ। आपको अपनी फैक्ट्री में एक स्पेशल ABT (Availability Based Tariff) मीटर लगाना होता है। यह स्मार्ट मीटर हर 15 मिनट का डेटा (15-min time block) रिकॉर्ड करता है, क्योंकि एक्सचेंज पर बिजली का भाव हर 15 मिनट में बदलता है।

Q2. अगर किसी दिन IEX पर बिजली न मिले (या बादल छाए हों) तो क्या फैक्ट्री बंद हो जाएगी?
बिल्कुल नहीं। आपका लोकल डिस्कॉम (जैसे UPPCL) एक 'Standby Provider' (बैकअप) की तरह काम करता है। जिस दिन आपको एक्सचेंज से सस्ती बिजली नहीं मिलती, उस दिन आप स्वचालित रूप से डिस्कॉम की ग्रिड से बिजली ले सकते हैं (जिसके लिए आपको स्टैंडबाय चार्ज देना होता है)।

Q3. मुझे ओपन एक्सेस अप्रूवल (Approval) कौन देगा? क्या सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने होंगे?
2026 में, भारत सरकार ने एक 'National Single Window Green Open Access Portal' लॉन्च कर दिया है। आपको फाइलें लेकर दफ्तरों में नहीं घूमना है। आप ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं और अगर सब सही है तो 15 दिनों में 'डीम्ड अप्रूवल' (Deemed Approval) मिल जाता है।

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