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Rooftop Solar Subsidy 📅 February 14, 2026

Solar Subsidy Rejection Reasons 2026: Avoid 5 Major Mistakes

Solar Subsidy Rejection: सब्सिडी का फॉर्म रिजेक्ट क्यों होता है? 5 बड़ी गलतियां (2026 Guide)
Solar Subsidy Rejection Reasons PM Surya Ghar Form Cancelled India 2026

Solar Subsidy Rejection: सब्सिडी का फॉर्म रिजेक्ट क्यों होता है? 5 बड़ी गलतियां (2026 Guide)

क्या आपके 78,000 रुपये की सोलर सब्सिडी (Solar Subsidy) का फॉर्म नेशनल पोर्टल पर 'Rejected' (रद्द) दिखा रहा है? भारत में 'PM Surya Ghar Yojana' के तहत हर दिन हज़ारों लोग आवेदन करते हैं, लेकिन 2026 के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 30% फॉर्म किसी न किसी तकनीकी या दस्तावेज़ी गलती के कारण रिजेक्ट हो जाते हैं।

जब आप छत पर ₹1,60,000 का सोलर प्लांट लगवा लेते हैं और बाद में पता चलता है कि आपको सब्सिडी नहीं मिलेगी, तो यह एक बहुत बड़ा आर्थिक झटका (Financial Shock) होता है। लोग अक्सर वेंडर (Vendor) या बिजली विभाग (UPPCL) से लड़ते हैं, जबकि गलती फॉर्म भरते समय ही हो चुकी होती है।

इस 'मेगा-गाइड' में हम आपको बताएंगे कि वे 5 सबसे बड़ी गलतियां (Top 5 Mistakes) कौन सी हैं जो आपके सब्सिडी फॉर्म को सीधे डस्टबिन में डाल देती हैं, और अगर आप सोलर लगवाने जा रहे हैं, तो इन गलतियों से कैसे बचें।

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गलती 1: बिजली बिल और आधार कार्ड में नाम का अंतर (Name Mismatch)

सब्सिडी रिजेक्ट होने का यह नंबर 1 कारण है।

सरकार सब्सिडी सीधे आपके बैंक खाते (DBT) में भेजती है, जो आधार कार्ड से जुड़ा होता है। फॉर्म भरते समय सिस्टम चेक करता है कि जो नाम आपके बिजली के बिल (Electricity Bill) पर है, क्या वही स्पेलिंग (Spelling) आपके आधार कार्ड और बैंक खाते में है या नहीं।

उदाहरण: अगर बिल पर नाम "Ram Kumar" है, लेकिन आधार कार्ड और बैंक में "Ram Kumar Singh" है, तो कंप्यूटर तुरंत एप्लीकेशन को 'Mismatch Error' कहकर रिजेक्ट कर देगा।

समाधान: सोलर फॉर्म भरने से पहले, अपने लोकल बिजली घर (UPPCL) जाएं और ₹50 की फीस देकर अपने बिजली बिल का नाम (Name Change on Bill) बिल्कुल आधार कार्ड के अनुसार करवा लें। अगर बिल आपके दादाजी के नाम पर है, तो पहले मीटर अपने नाम पर ट्रांसफर करवाएं।

गलती 2: सस्ते 'Non-DCR' (विदेशी) पैनल लगवाना

कई बार लोग बाज़ार से कोई सस्ता चाइनीज़ (Chinese) या इम्पोर्टेड सोलर पैनल खरीद लेते हैं। लेकिन भारत सरकार 'Make in India' को बढ़ावा देने के लिए केवल उन्हीं पैनल्स पर सब्सिडी देती है जो भारत में बने हों।

पैनल का प्रकार (Panel Type)क्या सब्सिडी मिलेगी?कारण (Reason)
DCR (Domestic Content Requirement)हाँ (100%)इनके सोलर सेल (Cells) और मॉड्यूल दोनों भारत में ही बने होते हैं। (MNRE ALMM लिस्ट में शामिल)।
Non-DCR (Imported Cells)नहीं (रिजेक्ट)ये पैनल सस्ते होते हैं, लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाले सेल्स विदेश से मंगाए जाते हैं। सरकार इन्हें सब्सिडी नहीं देती।

समाधान: वेंडर से 'एग्रीमेंट' साइन करते समय साफ़ लिखवा लें कि वह ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल DCR पैनल्स ही लगाएगा।

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गलती 3: गैर-पंजीकृत (Non-Empaneled) वेंडर से काम कराना

क्या आपने अपने मोहल्ले के किसी ऐसे इलेक्ट्रीशियन या दुकानदार से सोलर लगवा लिया जो कहता है "मैं बहुत सस्ता लगा दूंगा"?

कड़वा सच: आपको सब्सिडी तभी मिलेगी जब आप अपना सोलर प्लांट केवल 'Empaneled Vendor' (पंजीकृत वेंडर) से लगवाएंगे। ये वो वेंडर्स होते हैं जिन्हें राज्य सरकार (जैसे UPNEDA) और बिजली विभाग ने जांच-परख कर लाइसेंस दिया होता है। अगर आप किसी भी आम दुकानदार से प्लांट लगवा लेंगे, तो नेशनल पोर्टल पर आपकी 'Installation Report' सबमिट ही नहीं हो पाएगी, और सब्सिडी 100% रिजेक्ट हो जाएगी।

गलती 4: स्वीकृत लोड (Sanctioned Load) से बड़ा प्लांट लगाना

आपके बिजली बिल पर एक 'Sanctioned Load' (स्वीकृत भार) लिखा होता है (जैसे 2 kW या 4 kW)।

UPPCL और अन्य राज्य डिस्कॉम्स (Discoms) का नियम है कि आप अपने घर की छत पर अपने स्वीकृत लोड से ज्यादा क्षमता का सोलर प्लांट नहीं लगा सकते (कुछ राज्यों में 150% तक की छूट है)।

  • गलती: आपका स्वीकृत लोड 2 kW है, लेकिन आपने लालच में आकर 5 kW का प्लांट लगवा लिया।
  • नतीजा: जब बिजली विभाग का जूनियर इंजीनियर (JE) 'नेट मीटर' लगाने आएगा, तो वह आपके 5 kW के प्लांट को देखकर रिपोर्ट को रिजेक्ट (Reject) कर देगा।
  • समाधान: बड़ा प्लांट लगाने से पहले ऑनलाइन जाकर अपने घर का स्वीकृत लोड बढ़वाएं (Load Enhancement)।
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गलती 5: Joint Inspection Report में देरी या गड़बड़ी

सोलर पैनल लगने के बाद, बिजली विभाग का अधिकारी (SDO/JE) और आपका वेंडर आपके घर आते हैं। वे चेक करते हैं कि प्लांट सही लगा है या नहीं। इसके बाद वे एक 'Joint Commissioning Report' (JCR) पोर्टल पर अपलोड करते हैं।

कई बार वेंडर लापरवाही करते हैं और यह रिपोर्ट हफ्तों तक पोर्टल पर अपलोड नहीं करते। या फिर वे अपलोड करते समय पैनल का सीरियल नंबर (Serial Number) या इनवर्टर का मॉडल नंबर गलत टाइप कर देते हैं। सिस्टम तुरंत 'डेटा मिसमैच' पकड़ लेता है और सब्सिडी होल्ड पर डाल देता है।

समाधान: अपने वेंडर के पीछे पड़ें कि वह 7 दिन के भीतर सही JCR रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करे, और 'नेट मीटर' चालू करवाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. अगर मेरा फॉर्म रिजेक्ट हो गया है, तो क्या मैं दोबारा (Re-apply) कर सकता हूँ?
हाँ। नेशनल पोर्टल पर 'Grievance' या 'Query' सेक्शन होता है। अगर नाम में गलती थी (Name Mismatch), तो आप अपना नाम बिल पर सही करवाकर, पोर्टल पर नया 'Name Change Affidavit' या नया बिल अपलोड करके अपनी एप्लीकेशन दोबारा शुरू (Re-initiate) करवा सकते हैं।

Q2. मैं कैसे चेक करूँ कि मेरा वेंडर 'Empaneled' (पंजीकृत) है या नहीं?
pmsuryaghar.gov.in की वेबसाइट पर जाएं। वहां "Empaneled Vendors" की एक पूरी लिस्ट (PDF) होती है। उसमें अपने राज्य और जिले के अनुसार अपने वेंडर का नाम खोजें।

Q3. क्या सब्सिडी सीधे मेरे खाते में आती है या वेंडर के खाते में?
सब्सिडी 100% आपके (उपभोक्ता के) बैंक खाते में आती है। अगर कोई वेंडर आपसे कहता है कि "सब्सिडी मैं अपने पास रख लूँगा और आपको सस्ता प्लांट दे दूँगा," तो वह आपसे झूठ बोल रहा है या फ्रॉड कर रहा है।

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