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Consumer Grievance & Complaint 📅 February 13, 2026

Transformer Replacement Rules 2026: Time Limit & Compensation Guide

Transformer Replacement Rules: गाँव में ट्रांसफार्मर जलने पर कितने घंटे में बदलना चाहिए? (Mega Guide 2026)
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Transformer Replacement Rules: गाँव में ट्रांसफार्मर जलने पर कितने घंटे में बदलना चाहिए? (2026 Guide)

क्या आपके मोहल्ले या गाँव का ट्रांसफार्मर जल गया है और कई दिनों से अंधेरा छाया हुआ है? भारत के अधिकांश ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में यह एक आम समस्या है। जब ट्रांसफार्मर जलता है, तो लाइनमैन या ठेकेदार अक्सर "चंदा" (पैसे) इकट्ठा करने की बात करते हैं और ट्रांसफार्मर बदलने में हफ्तों लगा देते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि Electricity (Rights of Consumers) Rules, 2020 के तहत सरकार ने एक सख्त समय-सीमा (Time Limit) तय की है? अगर बिजली विभाग तय समय में आपका ट्रांसफार्मर नहीं बदलता, तो वे आपको मुआवजा (Compensation) देने के लिए बाध्य हैं।

इस मेगा गाइड में, हम जानेंगे कि ट्रांसफार्मर जलने पर उसे बदलने का असली सरकारी नियम क्या है, शिकायत कैसे दर्ज करें (विशेषकर UPPCL के लिए), और लाइनमैन द्वारा पैसे मांगने पर क्या करें।

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1. ट्रांसफार्मर बदलने की समय-सीमा (Time Limits in India)

भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) ने उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए मानक तय किए हैं। इसके अनुसार, शहरों और गाँवों के लिए ट्रांसफार्मर बदलने का समय अलग-अलग है।

इलाका (Area Type)अधिकतम समय-सीमा (Maximum Time Limit)
मेट्रो शहर (Metro Cities)8 से 12 घंटे के भीतर
शहरी इलाके (Urban/Towns)24 घंटे (1 दिन) के भीतर
ग्रामीण इलाके (Rural/Villages)48 घंटे (2 दिन) के भीतर
कृषि फीडर (Agriculture/Tubewell)72 घंटे (3 दिन) के भीतर

2. उत्तर प्रदेश (UPPCL) के विशेष नियम (CM Directives)

अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं (MVVNL, PVVNL, DVVNL, PuVVNL), तो यहाँ के नियम और भी सख्त कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री और ऊर्जामंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि:

  • शहरी क्षेत्रों में: ट्रांसफार्मर जलने की सूचना मिलने के 24 घंटे के अंदर उसे ट्रोली (Trolley Transformer) या नए ट्रांसफार्मर से रिप्लेस करना अनिवार्य है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में: टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज होने के ठीक 48 घंटे के अंदर गाँव का ट्रांसफार्मर बदलना ही होगा।
  • अगर अधिकारी बहाना बनाते हैं कि "स्टोर में ट्रांसफार्मर नहीं है", तो यह उनकी विभागीय गलती मानी जाएगी, उपभोक्ता की नहीं।
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3. शिकायत कैसे दर्ज करें? (Correct Way to Complain)

सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है सिर्फ लोकल लाइनमैन (Lineman) या JE को फोन करके छोड़ देना। लोकल कर्मचारियों के पास आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता। सही तरीका यह है:

शिकायत करने के 3 पक्के तरीके:

  1. टोल-फ्री नंबर (1912): पूरे भारत में बिजली विभाग का नंबर 1912 है। कॉल करें, अपना अकाउंट नंबर बताएं और 'ट्रांसफार्मर डैमेज' की कंप्लेंट दर्ज कराएं। (अपना कंप्लेंट नंबर ज़रूर नोट करें)
  2. आधिकारिक ऐप (Consumer App): जैसे यूपी में 'UPPCL Consumer App' या 'UPPCL Smart App' पर जाकर Service Request में कंप्लेंट डालें।
  3. X (Twitter): ट्विटर पर अपने विभाग (जैसे @UPPCLLUCKNOW) और ऊर्जामंत्री को टैग करके ट्रांसफार्मर की फोटो के साथ ट्वीट करें। यह तरीका 2026 में सबसे तेज़ काम करता है।

4. क्या ट्रांसफार्मर बदलने का पैसा लगता है? (The Truth About "Chanda")

जवाब है: बिल्कुल नहीं (100% Free)।

ग्रामीण इलाकों में अक्सर देखा जाता है कि लाइनमैन या प्राइवेट ठेकेदार नया ट्रांसफार्मर लाने, गाड़ी का भाड़ा (Transport), या लेबर चार्ज के नाम पर गाँव वालों से 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक का "चंदा" मांगते हैं।

कानूनी सच्चाई: सरकारी ग्रिड का ट्रांसफार्मर जलना बिजली विभाग की तकनीकी विफलता (Overload या Short Circuit) है। इसे बदलने का पूरा खर्च (क्रेन, गाड़ी, लेबर, तेल) बिजली विभाग (Discom) उठाता है। किसी भी उपभोक्ता को इसके लिए एक रुपया भी देने की ज़रूरत नहीं है। अगर कोई पैसे मांगता है, तो सीधे एंटी-करप्शन ब्यूरो या 1912 पर 'भ्रष्टाचार' (Corruption) की शिकायत दर्ज करें।

5. देरी होने पर उपभोक्ता का अधिकार (Right to Compensation)

बहुत कम लोगों को पता है कि अगर विभाग तय समय (जैसे गाँव में 48 घंटे) के भीतर ट्रांसफार्मर नहीं बदलता है, तो आप हर दिन के हिसाब से मुआवजा (Compensation) मांग सकते हैं।

  • नियम: Electricity Act, 2003 के Section 43 और Consumer Rules 2020 के तहत।
  • मुआवजा राशि: आमतौर पर यह ₹50 से ₹100 प्रतिदिन प्रति उपभोक्ता (आपके राज्य के रेगुलेटरी कमीशन JERC/SERC के अनुसार) होता है।
  • कैसे क्लेम करें? यह पैसा सीधे आपके अगले बिजली बिल में 'Adjust' (माइनस) होकर आता है। इसके लिए आपको ऑनलाइन या SDO ऑफिस में लिखित क्लेम फॉर्म (Complaint Number के साथ) देना होता है।
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6. स्मार्ट ग्रिड का प्रभाव: भविष्य में क्या होगा?

2026 में आ रही 'स्मार्ट ग्रिड' (Smart Grid) तकनीक के साथ, ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं कम हो रही हैं। IoT Sensors ट्रांसफार्मर के तेल के तापमान और लोड को रियल-टाइम में मॉनिटर करते हैं। जैसे ही ट्रांसफार्मर पर क्षमता से ज्यादा लोड पड़ता है, सिस्टम खुद-ब-खुद कुछ इलाकों की बिजली काटकर उसे जलने से बचा लेता है (Auto-Tripping)।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. लाइनमैन कहता है कि जिन लोगों का बिल बकाया है, जब तक वे जमा नहीं करेंगे, ट्रांसफार्मर नहीं बदला जाएगा। क्या यह सही है?
नहीं, यह पूरी तरह गैर-कानूनी है। अगर एक भी व्यक्ति नियमित बिल भर रहा है, तो विभाग को ट्रांसफार्मर बदलना ही होगा। बकायेदारों की लाइन अलग से काटी जा सकती है, लेकिन पूरे गाँव को सामूहिक सज़ा (Mass Disconnection) देना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।

Q2. ट्रांसफार्मर से तेल (Oil) गिर रहा है, क्या करें?
तेल लीक होना खतरनाक है और इसके कारण ट्रांसफार्मर ब्लास्ट हो सकता है। तुरंत 1912 पर कॉल करके "Oil Leakage and Fire Hazard" की शिकायत करें। विभाग इसे प्राथमिकता पर ठीक करता है।

Q3. अगर अधिकारी 1912 की शिकायत को बिना काम किए 'Solve' दिखा दें तो क्या करें?
आप 1912 पर दोबारा कॉल करके शिकायत 'Re-open' करवा सकते हैं या सीधे 'Chief Engineer' (CE) के ऑफिस या CM Helpline (जैसे यूपी में 1076) पर कॉल कर सकते हैं।

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