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Consumer Grievance & Complaint 📅 February 13, 2026

UPPCL 1912 Complaint Status 2026: IGRS (1076) & CGRF Escalation

UPPCL 1912 Complaint Status: शिकायत करने के बाद भी समाधान न हो तो क्या करें? (2026 Guide)
UPPCL 1912 Complaint Escalation IGRS CGRF India

UPPCL 1912 Complaint Status: शिकायत करने के बाद भी समाधान न हो तो क्या करें? (2026 Guide)

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है? आपके इलाके का ट्रांसफार्मर जल गया है या बिजली का बिल गलत आ गया है। आपने UPPCL के टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराई। आपको मोबाइल पर एक कंप्लेंट नंबर (Ticket ID) मिल गया। आप राहत की सांस लेते हैं कि अब काम हो जाएगा। लेकिन अगले ही दिन आपको एक SMS आता है: "आपकी शिकायत का सफलतापूर्वक समाधान कर दिया गया है (Your complaint is resolved)", जबकि हकीकत में कोई अधिकारी या लाइनमैन देखने तक नहीं आया!

भारत में, विशेषकर उत्तर प्रदेश में, यह उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी समस्या है। अधिकारी अपने 'टारगेट' (SLA - Service Level Agreement) को पूरा दिखाने के लिए बिना काम किए ही ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत को 'बंद' (Close) कर देते हैं।

अगर 1912 से आपकी समस्या हल नहीं हो रही है, तो निराश होकर बैठने की ज़रूरत नहीं है। 2026 में Electricity Grievance Redressal (विद्युत शिकायत निवारण) का एक पूरा 'एस्केलेशन मैट्रिक्स' (Escalation Matrix) मौजूद है। इस मेगा गाइड में हम जानेंगे कि 1912 की शिकायत बंद होने के बाद आपको किन 4 बड़े दरवाज़ों पर खटखटाना चाहिए, जहाँ अधिकारियों को आपकी बात सुननी ही पड़ेगी।

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1. 1912 की शिकायतें बिना काम किए क्यों बंद हो जाती हैं? (The Ground Reality)

जब आप 1912 पर कॉल करते हैं, तो आपकी शिकायत लखनऊ या मुख्य सर्वर पर दर्ज होती है और वहाँ से आपके लोकल SDO (Sub-Divisional Officer) या JE (Junior Engineer) के पोर्टल पर 'फॉरवर्ड' कर दी जाती है।

नियमों के अनुसार, अधिकारियों को 24 से 48 घंटे में समस्या का समाधान करना होता है। लेकिन कई बार बजट की कमी, ट्रांसफार्मर न होने, या काम की अधिकता के कारण वे समय पर काम नहीं कर पाते। 'लेट-लतीफी' की रिपोर्ट से बचने और अपनी नौकरी बचाने के लिए, लोकल कर्मचारी अक्सर पोर्टल पर झूठी रिपोर्ट लगा देते हैं कि "समस्या का समाधान कर दिया गया है।"

अगर आपके साथ ऐसा हुआ है, तो 1912 पर दोबारा कॉल करें और कहें: "मेरी शिकायत बिना समाधान के बंद कर दी गई है, कृपया इसे Re-open करें।" अगर फिर भी काम न हो, तो नीचे दिए गए 'लेवल्स' (Levels) का इस्तेमाल करें।

2. लेवल 1: XEN और सोशल मीडिया (The Power of 'X')

अगर लोकल जेई (JE) या एसडीओ (SDO) बात नहीं सुन रहे हैं, तो शिकायत को उनके बॉस तक ले जाएं।

  • XEN (Executive Engineer): अपने ज़िले के 'अधिशासी अभियंता' के कार्यालय में 1912 के कंप्लेंट नंबर के साथ एक लिखित प्रार्थना पत्र दें।
  • सोशल मीडिया का वार: 2026 में सबसे तेज़ काम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पहले Twitter) पर होता है। अपनी समस्या, 1912 का पुराना कंप्लेंट नंबर, और अगर कोई फोटो हो (जैसे जले हुए तार), तो उसे पोस्ट करें।
    टैग करें: @UPPCLLUCKNOW, @UPGovt, और अपने क्षेत्र के ऊर्जा मंत्री को। UPPCL का सोशल मीडिया सेल बहुत एक्टिव है और वे सीधे लोकल अधिकारियों से जवाब मांगते हैं।
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3. लेवल 2: IGRS (CM हेल्पलाइन 1076) - सबसे बड़ा हथियार

अगर बिजली विभाग आपकी बात नहीं सुन रहा है, तो मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) आपकी बात सुनेगा। उत्तर प्रदेश में IGRS (Integrated Grievance Redressal System) या 'जनसुनवाई पोर्टल' सबसे ताकतवर टूल है।

IGRS पर शिकायत कैसे करें?

  1. अपने मोबाइल से 1076 (CM Helpline) पर कॉल करें या 'Jansunwai App' डाउनलोड करें।
  2. ऑपरेटर को अपनी पूरी समस्या बताएं और यह भी बताएं कि 1912 की शिकायत को बिना काम किए झूठा बंद कर दिया गया।
  3. आपको एक 'IGRS Number' मिलेगा।
यह काम क्यों करता है? IGRS की मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (लखनऊ) से होती है। अगर कोई अधिकारी IGRS की शिकायत को झूठा बंद करता है, तो उसे सस्पेंड (Suspend) किया जा सकता है। इसलिए अधिकारी 1076 की शिकायत से बहुत डरते हैं और तुरंत काम करते हैं।

4. लेवल 3: CGRF (Consumer Grievance Redressal Forum)

अगर आपकी समस्या बड़ी है (जैसे बिल 5 लाख रुपये आ गया हो, या नया कनेक्शन न मिल रहा हो) और IGRS से भी काम नहीं बना, तो आपको CGRF जाना चाहिए।

CGRF (उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम) बिजली विभाग का एक "आंतरिक न्यायालय" (Internal Court) है। हर ज़ोन/मंडल में एक CGRF होता है।

  • प्रक्रिया: यहाँ आपको एक सादे कागज़ पर अपनी शिकायत लिखकर, पुराने 1912 के नंबर और सारे सबूतों के साथ जमा करनी होती है।
  • समय-सीमा: CGRF को कानूनी रूप से 45 दिनों के भीतर आपकी सुनवाई करके फैसला सुनाना अनिवार्य है। यह कोर्ट की तरह काम करता है, जहाँ आपको और SDO दोनों को आमने-सामने बैठाकर जवाब मांगा जाता है।

5. लेवल 4: विद्युत लोकपाल (Electricity Ombudsman)

अगर CGRF के जज ने भी बिजली विभाग के पक्ष में फैसला सुना दिया और आप संतुष्ट नहीं हैं, तो आपके पास "विद्युत लोकपाल" (Electricity Ombudsman) के पास जाने का अधिकार है।

विद्युत लोकपाल क्या है?
यह एक स्वतंत्र और सर्वोच्च कानूनी संस्था है जो राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के अंतर्गत आती है। लोकपाल बिजली विभाग से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं।

कब जा सकते हैं? CGRF का फैसला आने के 30 दिनों के भीतर आप लोकपाल के पास अपील (Appeal) कर सकते हैं। लोकपाल का आदेश SDO और चीफ इंजीनियर सबको मानना ही पड़ता है, अन्यथा उन पर भारी जुर्माना लगता है।
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6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या 1912 पर शिकायत करने का कोई पैसा लगता है?
बिल्कुल नहीं। 1912 पूरी तरह से एक टोल-फ्री नंबर है और इस पर शिकायत दर्ज कराना 100% मुफ्त है।

Q2. मैं अपनी 1912 शिकायत का ऑनलाइन स्टेटस (Status) कैसे चेक करूँ?
आप UPPCL की आधिकारिक वेबसाइट (uppcl.org) पर जाकर "Track Complaint" सेक्शन में अपना कंप्लेंट नंबर डालकर वर्तमान स्थिति देख सकते हैं।

Q3. अगर मुझे बिजली कटने के कारण आर्थिक नुकसान हुआ है, तो क्या करूँ?
अगर विभाग की लापरवाही (जैसे ट्रांसफार्मर न बदलने) के कारण आपकी दुकान या फैक्ट्री बंद रही, तो आप Electricity Act 2003 के तहत मुआवजे (Compensation) की मांग के लिए सीधे 'Consumer Court' (उपभोक्ता न्यायालय) में भी मुकदमा दर्ज कर सकते हैं।

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