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Industrial Power Solutions 📅 February 14, 2026

Industrial Tariff Rates UP 2026: UPPCL LMV-6 & HV-2 Guide

Industrial Tariff Rates UP 2026: फैक्ट्री और उद्योगों के लिए बिजली की नई दरें (Mega Guide)
UPPCL Industrial Electricity Tariff Rates LMV-6 HV-2 India 2026

Industrial Tariff Rates UP 2026: फैक्ट्री और उद्योगों के लिए बिजली की नई दरें (Mega Guide)

उत्तर प्रदेश में फैक्ट्री (Factory), वर्कशॉप (Workshop) या कोल्ड स्टोरेज चला रहे हैं? एक उद्योगपति (Industrialist) के रूप में आपकी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट का सबसे बड़ा हिस्सा बिजली का बिल (Electricity Bill) होता है। अगर आपको UPPCL (Uttar Pradesh Power Corporation Limited) के टैरिफ स्ट्रक्चर, बिल कैलकुलेशन और 'पेनल्टी' के नियमों की सही जानकारी नहीं है, तो आप हर महीने बिना जाने ही लाखों रुपये का नुकसान कर रहे हैं।

2026 में, UPERC (उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग) ने इंडस्ट्रियल बिजली दरों को पूरी तरह से kVAh (kilo-Volt-Ampere-Hour) और स्मार्ट मीटरिंग के आधार पर अपडेट कर दिया है। अब सिर्फ मशीनें चलाना काफी नहीं है; आप किस 'समय' (Time of Day) मशीनें चलाते हैं, इससे आपका बिल 20% तक कम या ज्यादा हो सकता है।

इस कमर्शियल B2B गाइड में, हम UPPCL की दो सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक श्रेणियों: LMV-6 (छोटे उद्योग) और HV-2 (भारी उद्योग) के 2026 के ताज़ा रेट्स, फिक्स्ड चार्ज, और बिल बचाने की स्मार्ट रणनीतियों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

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1. LMV-6 टैरिफ: छोटे और मध्यम उद्योग (LT Connection)

LMV-6 (Low & Medium Voltage) श्रेणी उन छोटे कारखानों, आटा चक्कियों, राइस मिलों, और वर्कशॉप्स के लिए है जिनका स्वीकृत भार (Sanctioned Load) 50 kW से लेकर 100 kW (440V थ्री-फेज़) तक होता है।

इस श्रेणी के बिल में दो मुख्य भाग होते हैं: फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charge) और एनर्जी चार्ज (Energy Charge)।

चार्ज का प्रकार (Type of Charge)2026 की दरें (UPPCL Tariff)
फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charge)₹290 प्रति kW प्रति माह
एनर्जी चार्ज (Energy Charge)₹7.30 प्रति kVAh (यूनिट)
विद्युत कर (Electricity Duty)बिल की कुल राशि का 7.5%
महत्वपूर्ण नियम: अगर आपकी फैक्ट्री महीने भर बंद भी रहती है, तो भी आपको अपने स्वीकृत लोड के अनुसार 'फिक्स्ड चार्ज' (जैसे 50kW x ₹290 = ₹14,500) हर महीने देना ही पड़ेगा।

2. HV-2 टैरिफ: भारी उद्योग (HT Connection)

HV-2 (High Voltage) श्रेणी उन बड़े कारखानों, रोलिंग मिलों, और आईटी पार्कों के लिए है जो 11kV, 33kV या उससे ऊपर की लाइनों से सीधे अपना निजी ट्रांसफार्मर (Dedicated Transformer) लगाकर बिजली लेते हैं। इसमें लाइन लॉस कम होता है, इसलिए UPPCL इन्हें सस्ती बिजली (Rebate) देता है।

सप्लाई वोल्टेज (Supply Voltage)फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charge)एनर्जी चार्ज (Energy Charge)
11 kV लाइन पर₹300 / kVA / माह₹6.65 प्रति kVAh
33 kV लाइन पर₹290 / kVA / माह₹6.35 प्रति kVAh
66 kV & 132 kV लाइन पर₹270 / kVA / माह₹6.15 प्रति kVAh

(स्पष्ट है कि जितना बड़ा आपका वोल्टेज कनेक्शन होगा, प्रति यूनिट बिजली का रेट उतना ही सस्ता होता जाएगा।)

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3. Time of Day (ToD) टैरिफ 2026: समय का खेल

2026 के स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम में, UPPCL ने इंडस्ट्रियल बिलिंग के लिए Time of Day (ToD) सिस्टम लागू कर दिया है। इसका मतलब है कि पूरे 24 घंटे बिजली का रेट एक समान नहीं रहता।

समय (Time Period)ToD सरचार्ज / रिबेट (Surcharge/Rebate)सलाह (Action)
दोपहर (10:00 AM से 04:00 PM)- 20% रिबेट (सस्ती बिजली)इस समय हैवी मशीनें चलाएं, क्योंकि सोलर पावर के कारण ग्रिड में बिजली सस्ती होती है।
सामान्य समय (04:00 AM से 10:00 AM)0% (बेस रेट)सामान्य काम करें।
शाम/पीक आवर्स (05:00 PM से 10:00 PM)+ 20% सरचार्ज (पेनल्टी)इस समय हैवी लोड बंद कर दें। यह दिन की सबसे महंगी बिजली है।
रात (10:00 PM से 04:00 AM)0% (बेस रेट)नाइट शिफ्ट के लिए उपयुक्त।

4. kVAh बिलिंग और पावर फैक्टर पेनल्टी का गणित

उत्तर प्रदेश में इंडस्ट्रियल बिल अब 'kWh' (वास्तविक बिजली) पर नहीं, बल्कि kVAh (Apparent Power) पर आते हैं।

पावर फैक्टर (PF) की अहमियत:
kVAh = kWh / Power Factor.
अगर आपकी फैक्ट्री का पावर फैक्टर 0.80 है, तो 10,000 यूनिट इस्तेमाल करने पर भी UPPCL आपको 12,500 यूनिट्स का बिल भेजेगा! यानी सीधे 2,500 यूनिट्स (लगभग ₹20,000) का नुकसान। इससे बचने के लिए अपनी फैक्ट्री के सबस्टेशन पैनल में APFC (Automatic Power Factor Correction) पैनल और कैपेसिटर बैंक ज़रूर लगाएं।
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5. फैक्ट्री का बिजली बिल कैसे कम करें? (3 Pro Tips)

स्मार्ट फैक्ट्री मालिक अपने बिल को कम करने के लिए इन 3 रणनीतियों (Strategies) का उपयोग करते हैं:

  • ओपन एक्सेस (Open Access): अगर आपका लोड 100 kW या उससे अधिक है, तो आप UPPCL को बायपास करके IEX (Indian Energy Exchange) से 'Green Open Access' के तहत ₹4 से ₹5 प्रति यूनिट में सीधे बिजली खरीद सकते हैं।
  • शिफ्ट टाइमिंग (Shift Management): अपनी मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट्स को ToD टैरिफ के अनुसार एडजस्ट करें। शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक केवल वही मशीनें चलाएं जो बहुत ज़रूरी हों, ताकि +20% पेनल्टी से बचा जा सके।
  • SLD ऑडिट (Single Line Diagram Audit): एक सर्टिफाइड इंजीनियर से अपनी फैक्ट्री का SLD ऑडिट करवाएं। यह सुनिश्चित करेगा कि आपका लोड तीनों फेज़ पर बैलेंस (Balanced) है, जिससे केबल में हीट (Line Loss) के रूप में बर्बाद होने वाली बिजली बचेगी।

6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. अगर मैं अपनी फैक्ट्री का लोड इस्तेमाल नहीं कर रहा हूँ, तो क्या फिक्स्ड चार्ज माफ़ हो सकता है?
नहीं। जब तक आपका कनेक्शन स्थायी रूप से काटा (Permanent Disconnection) नहीं जाता, आपको अनुबंधित भार (Contracted Load) के अनुसार 'फिक्स्ड डिमांड चार्ज' हर महीने देना ही होगा।

Q2. UPPCL में "Demand Exceed Surcharge" (MD पेनल्टी) क्या होता है?
अगर आपका स्वीकृत लोड 100 kW है, और स्मार्ट मीटर रिकॉर्ड करता है कि आपने किसी भी 15-मिनट के ब्लॉक में 110 kW की बिजली खींची है, तो उस अतिरिक्त 10 kW पर आपको दोगुना (Double) फिक्स्ड चार्ज पेनल्टी के रूप में देना होगा।

Q3. क्या MSME उद्योगों को UPPCL टैरिफ में कोई छूट मिलती है?
राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों (Industrial Policy) के तहत नई स्थापित होने वाली MSME इकाइयों को कुछ वर्षों के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी (7.5%) में छूट (Exemption) मिल सकती है। इसके लिए आपको 'निवेश मित्र' (Nivesh Mitra) पोर्टल पर अप्लाई करना होता है।

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