Bijli Babu — Final Normal Header
AI & Smart Grid Tech 📅 February 13, 2026

Wireless Electricity Technology 2026: Future of Power Transmission

Wireless Electricity: क्या भविष्य में बिना तार के बिजली सप्लाई होगी? (Mega Guide 2026)
Wireless Electricity Power Transmission Future 2026

Wireless Electricity: क्या भविष्य में बिना तार के बिजली सप्लाई होगी? नई टेक्नोलॉजी (2026)

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आपके घर में टीवी, फ्रिज और एसी चल रहे हों, लेकिन वे किसी तार (Wire) से न जुड़े हों? 100 साल पहले महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) ने एक सपना देखा था—पूरी दुनिया को हवा के माध्यम से मुफ्त और वायरलेस बिजली देना। तब यह एक जादू लगता था, लेकिन 2026 में यह विज्ञान की सच्चाई बन चुका है।

आज हम अपने मोबाइल फोन को बिना तार के चार्ज (Wireless Charging) कर लेते हैं। लेकिन अब बात मोबाइल से आगे बढ़कर घरों, कारखानों और पूरे शहरों को बिना खंभों और तारों के बिजली देने तक पहुँच गई है। न्यूज़ीलैंड से लेकर जापान तक की टेक कंपनियां इस पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।

इस मेगा गाइड में, हम 'Wireless Power Transmission' (WPT) की तकनीक, इसके काम करने के तरीके, और भारत के पावर ग्रिड (जैसे UPPCL) पर इसके भविष्य के प्रभाव का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

[AdSense Slot: High CPC Technology/Investment Ad]

1. निकोला टेस्ला का सपना और वार्डनक्लिफ टावर

वायरलेस बिजली का इतिहास 1890 के दशक से शुरू होता है। निकोला टेस्ला ने 1901 में न्यूयॉर्क में 'वार्डनक्लिफ टावर' (Wardenclyffe Tower) का निर्माण शुरू किया था। उनका मानना था कि पृथ्वी खुद एक विशाल कंडक्टर (Conductor) है और इसके माध्यम से पूरी दुनिया में बिना तारों के ऊर्जा भेजी जा सकती है।

दुर्भाग्य से, जे.पी. मॉर्गन (J.P. Morgan) जैसे निवेशकों ने अपना पैसा वापस ले लिया क्योंकि "अगर बिजली मुफ्त और हवा में होगी, तो उसका बिल कैसे वसूला जाएगा?" टेस्ला का वह प्रोजेक्ट अधूरा रह गया, लेकिन आज की मॉडर्न टेक्नोलॉजी उसी सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है।

2. वायरलेस बिजली काम कैसे करती है? (How WPT Works)

आज के समय में बिजली को हवा में भेजने के 3 मुख्य तरीके हैं:

A. इंडक्टिव कपलिंग (Inductive Coupling)

यह वह तकनीक है जिसका इस्तेमाल आपके स्मार्टफोन या स्मार्टवॉच के वायरलेस चार्जर में होता है। इसमें चार्जर (Transmitter) और फ़ोन (Receiver) के अंदर कॉइल (Coil) होते हैं। जब इनमें बिजली गुजरती है, तो एक मैग्नेटिक फील्ड बनता है जो ऊर्जा को ट्रांसफर करता है।
कमी: यह केवल कुछ मिलीमीटर या सेंटीमीटर की दूरी तक ही काम करता है।

B. रेजोनेंट मैग्नेटिक कपलिंग (Resonant Magnetic Coupling)

इस तकनीक से बिजली को कुछ मीटर तक (जैसे एक कमरे के अंदर) भेजा जा सकता है। WiTricity जैसी कंपनियां इस तकनीक का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) को बिना प्लग लगाए चार्ज करने के पैड बना रही हैं। आप गाड़ी पैड के ऊपर खड़ी करें और वह चार्ज होने लगेगी।

C. माइक्रोवेव/लेजर पावर ट्रांसमिशन (Long Distance)

अगर बिजली को मीलों दूर (शहरों या अंतरिक्ष से) भेजना हो, तो इंडक्शन काम नहीं करता। इसके लिए बिजली को Microwaves (सूक्ष्म तरंगों) या Laser Beams में बदला जाता है। ट्रांसमीटर इसे हवा में फायर करता है, और रिसीवर (Rectenna) इसे पकड़कर वापस बिजली (DC current) में बदल देता है।

[AdSense Slot: Renewable Energy Stocks Ad]

3. Emrod: वह कंपनी जो इसे सच कर रही है

न्यूज़ीलैंड की एक टेक स्टार्टअप कंपनी Emrod ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो कई किलोमीटर दूर तक बिना तारों के कमर्शियल बिजली भेज सकता है।

  • काम का तरीका: Emrod बिजली को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों (Microwaves) में बदलता है। इन तरंगों को एक एंटीना से दूसरे एंटीना तक बीम (Beam) किया जाता है।
  • सुरक्षा: बीम के चारों ओर एक "लेज़र सुरक्षा जाल" होता है। अगर कोई पक्षी, ड्रोन, या इंसान उस बीम के बीच में आता है, तो सिस्टम कुछ मिलीसेकंड में खुद को बंद कर लेता है, जिससे कोई जलता नहीं है।
  • उपयोग: इसका पहला कमर्शियल ट्रायल पावरको (Powerco - न्यूज़ीलैंड की बिजली कंपनी) के साथ हो रहा है। इसका उपयोग पहाड़ों, जंगलों या उन जगहों पर किया जाएगा जहाँ खंभे और तार लगाना बहुत महंगा है।

4. अंतरिक्ष से धरती पर बिजली (Space-Based Solar Power)

यह वायरलेस बिजली का 'अल्टीमेट' (Ultimate) रूप है। पृथ्वी पर लगे सोलर पैनल रात में या बादलों के कारण काम नहीं करते। लेकिन अंतरिक्ष में हमेशा धूप रहती है।

प्रोजेक्ट 2030: यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और जापान (JAXA) इस पर तेजी से काम कर रहे हैं। योजना यह है कि अंतरिक्ष में विशालकाय सोलर पैनल लगाए जाएं। ये पैनल 24 घंटे बिजली बनाएंगे, उसे माइक्रोवेव में बदलेंगे, और धरती पर लगे एक बहुत बड़े रिसीवर (Rectenna) पर वायरलेस बीम करेंगे। अगर यह सफल हुआ, तो दुनिया की ऊर्जा समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

[AdSense Slot: Future Tech / Engineering College Ad]

5. भारत और स्मार्ट ग्रिड पर इसका असर (Investment & Future)

भारत में बिजली का वितरण (जैसे UPPCL, NBPDCL) एक बहुत खर्चीला काम है। आंधी-तूफान में तार टूटना और लाइन लॉस (Transmission Loss) सबसे बड़ी समस्याएं हैं।

पारंपरिक ग्रिड (तार वाले)वायरलेस पावर ग्रिड (भविष्य)
कॉपर और एल्युमीनियम के तारों का भारी खर्च।तारों और खंभों का खर्च शून्य (Zero)।
खराब मौसम (बारिश/तूफान) में बिजली कटना तय।मौसम का माइक्रोवेव बीम पर बहुत कम असर।
तारों में चोरी (कटिया कनेक्शन) बहुत आसान।बीम से बिजली चुराना तकनीकी रूप से असंभव।
निवेश का मौका (Investment Perspective):
वायरलेस पावर अभी रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) फेज़ में है। लेकिन जो कंपनियां स्मार्ट मीटरिंग, माइक्रोग्रिड, और EV वायरलेस चार्जिंग इक्विपमेंट (जैसे ABB, Siemens, Tata Power) बना रही हैं, वे भविष्य के इस बदलाव की पहली लाभार्थी होंगी।

6. क्या यह इंसानों के लिए सुरक्षित है? (Challenges & Safety)

हर नई तकनीक के साथ डर जुड़ा होता है। लोग पूछते हैं, "अगर बिजली हवा में उड़ेगी, तो क्या हम 'फ्राई' (Roast) नहीं हो जाएंगे?"

सच्चाई: वायरलेस पावर के लिए जो माइक्रोवेव इस्तेमाल होती हैं, वे 'Non-ionizing' (गैर-आयनकारी) होती हैं। ये एक्स-रे (X-ray) की तरह हमारे DNA को नुकसान नहीं पहुँचातीं। इसके अलावा, सिस्टम में 'Line of Sight' सेफ्टी होती है। बीम के बीच कोई भी रुकावट आने पर बिजली तुरंत कट जाती है।

सबसे बड़ी चुनौती: एफिशिएंसी (Efficiency)। अभी बिजली को हवा में भेजने पर बहुत सारी ऊर्जा (करीब 30-40%) रास्ते में ही बर्बाद हो जाती है। जब तक यह लॉस कम नहीं होता, यह तारों का 100% विकल्प नहीं बन सकता।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या 2026 में मेरे घर में वायरलेस बिजली आ जाएगी?
नहीं, 2026 तक यह तकनीक केवल इंडस्ट्रियल और रिमोट लोकेशन्स (पहाड़ी इलाकों) के लिए ही कमर्शियल होगी। घरों तक पहुँचने में इसे 10 से 15 साल और लगेंगे।

Q2. क्या निकोला टेस्ला ने सच में फ्री बिजली बना ली थी?
टेस्ला ने तकनीक खोज ली थी, लेकिन वह बड़े स्तर पर बिजली (High Voltage) भेजने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाए थे क्योंकि उन्हें फंडिंग मिलना बंद हो गई थी।

Q3. क्या वायरलेस बिजली से मीटर का बिल आएगा?
बिल्कुल। भविष्य के स्मार्ट मीटर (Smart Meters) सीधे रिसीवर एंटीना से जुड़े होंगे। जितनी बिजली आपका एंटीना रिसीव करेगा, उसका डिजिटल बिल आपके अकाउंट से कटेगा।

Scroll to Top